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Friday, April 26, 2013

ऐसा कभी ना करना


किसी गुमनाम शायर की गज़ल है...
अच्छी लगी शेयर कर रहा हूँ

तुम रुठ जाओ मुझसे, ऐसा कभी ना करना
मैं एक नज़र को तरसूं, ऐसा कभी ना करना
मैं पूछ पूछ हारूं... सौ सौ सवाल कर के
तुम कुछ जवाब ना दो, ऐसा कभी ना करना
मुझसे ही मिल के हसना, मुझसे ही मिल के रोना
मुझसे बिछड़ के जी लो, ऐसा कभी ना करना
तुम चाँद बन के रहना, मैं देखता रहूँगा
किसी रोज़ तुम ना निकलो, ऐसा कभी ना करना
तुम चले जाओ जब भी तो देखूं तुम्हारा रस्ता
तुम लौट के ना आओ... ऐसा कभी ना करना

Wednesday, April 17, 2013

बिछडन

कल गुनगुन जा रही है अपने घर।
उसके पापा आये हैं उसे अपने साथ ले जाने...
आज पहली बार राज का आना अच्छा नहीं लग रहा है... 
ऐसा लग रहा है जैसे वो मेरी साँसे ले जाने आयें  हैं । घर में अजीब सी शांति है... सभी चुप हैं।
शशि स्लो मोशन में पैकिंग कर रही है...
इन सब के बीच गुनगुन अपनी दुनिया में मस्त है... स्वछंद... अबोध... बेफिक्र !!!